#OneNationOneElection!

The idea of holding simultaneous elections for Lok Sabha and State Assemblies has come into focus recently. It is being projected as a ‘game changing’ idea that would cut cost and make the system more efficient. What lies behind it ? Is it really a ‘revolutionary idea’? On closer examination it seems to be a deeply problematic concept which needs to be looked at critically. It may attack at the very roots of democratic system as envisaged in the constitution. We need to be wary of this idea that is apparently in line with what Pratap Bhanu Mehta has called ‘permanent revolution’. Blog explores this proposition .

O Nation, You are Great and Mighty!

-Rajesh Kumar Jha O Nation you are great and mighty, And I am small. My eyes widen, jaws drop and hands tremble, When I see your might, I find myself feeble. On the snow clad mountain, Inside the jungle and across the ravines, on enemies from beyond and enemies from within, encounter or gun battle,… Continue reading O Nation, You are Great and Mighty!

करेंगे या मरेंगे (काउंटी कलेन)

इस कविता से एक रोचक प्रसंग जुड़ा हुआ है। भारत छोड़ो आंदोलन के शुरू होने के 10 दिनों के अंदर, 19 अगस्‍त 1942 को अमेरिका में एक कविता अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी। प्रसिद्ध अफ्रीकी-अमेरिकी कवि काउंटी कलन की इस अंग्रेजी कविता का शीर्षक था ‘करेंगे या मरेंगे’, डू ऑर डाय’ नहीं, ‘करेंगे या मरेंगे’। सोचने की बात ये है कि आखिर अंग्रेजी में लिख रहे इस अश्‍वेत संघर्ष के कवि ने ‘करेंगे या मरेंगे’ का अंग्रेजी अनुवाद न करके अपनी अंग्रेजी कविता का शीर्षक गांधी के शब्‍दों को ज्‍यों का त्‍यों रखा, जबकि हमारे देश के अनुवादक और इतिहासकर्मी ‘करो या मरो’ क्‍यों लिखने लगे ?

धीरे धीरे मरते जाते हैं हम (मार्था मद्योस*)

It is the translation of a poem ‘You start dying slowly’ (Muere Lentamente) wrongly attributed to Pablo Neruda. It is actually written by the Brazilian writer Martha Medeiros, author of numerous books and reporter for the Porto Alegre newspaper Zero Hora. It is a beautiful poem. Here is the Hindi translation of this poem

रवींद्रनाथ टैगोर की कविता

(आनंद कुमारस्वामी की पुस्तक डांस ऑफ शिवा से उद्धृत) अनुवाद- राजेश कुमार झा विरक्त हो संसार से, मुक्ति का यह मार्ग नहीं मेरा। संसार चक्र के शतबंधन से आबद्ध, करूँ आस्वादन अनंतमुक्ति, अमृतरस का… ध्वनि, दृश्य, गंध के हर स्पंदन से निःसृत, करूँ रसपान तेरे परम आह्लाद का, भाव व आसक्ति  की चिंगारी से सिंचित… Continue reading रवींद्रनाथ टैगोर की कविता

विस्लावा सिंबोर्सका की कविताएं

विस्लावा सिंबोर्र्स्का- पोलिश कवि। जन्म 1923, मृत्यु 2012। साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से 1996 में सम्मानित। सिंबोर्स्का की कविताएं अपनी सादगी के भीतर छिपे गूढ़ एवं गंभीर निहितार्थों के लिए जानी जाती हैं। घरेलू जिंदगी के बिंबों को महान ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़ने वाली इनकी कविताओं का चुटीलापन गहरा असर छोड़ती हैं। संभावनाएं (अनुवाद:… Continue reading विस्लावा सिंबोर्सका की कविताएं

Stories and Legends of the Liangmai Nagas- Sujata Miri

  About the Book   Author: Sujata Miri Translation: Rajesh K. Jha Binding: Paperback Year of Publication:2014 Language: English Edition: 2nd Edition No of Pages: 95 Pages ISBN:81-237-4840-5 ISBN 13:978-81-237-4840-5 Subject:Folklore Liangmais are a subtribe of Zeliangrong Nagas. This tribe resides in the present day Nagaland, Manipur and Assam. The stories in this collection bring… Continue reading Stories and Legends of the Liangmai Nagas- Sujata Miri