निज़ार कब्बानी की कविताएं

Nizar Qabbani (1923-1998), Syrian poet and diplomat. His poetic style combines simplicity and elegance in exploring themes of love, eroticism, feminism, religion, and Arab nationalism. Qabbani is one of the most revered contemporary poets in the Arab world. Here are three of his poems translated into Hindi (from English translations)

बेन ओकरी की कविताएं

बेन ओकरी प्रसिद्ध अफ्रीकी साहित्यकार। जन्म- नाइजीरिया, 1959। कवि और उपन्यासकार के रूप में बेन ओकरी को आधुनिककाल के महान लेखकों में गिना जाता है। उपन्यास दि फैमिश्ड रोड के लिए 1991 में बुकर पुरस्कार से सम्मानित। आलोचकों ने ओकरी की तुलना मार्केज से की है और उनकी रचनाओं में मैजिक रिएलिज्म के तत्व गिनाए… Continue reading बेन ओकरी की कविताएं

अंधायुग (बर्त्तोल ब्रेख्त)

(बर्त्तोल   ब्रेख्त- 20वीं सदी के महान कवि, नाटककार तथा निर्देशक। जन्म- जर्मनी 1898, मृत्यु-1956। ब्रेख़्त ने नाटकों को एक नयी शैली प्रदान की। मदर करेज और थ्री पेनी ओपेरा उनके प्रसिद्ध नाटक हैं। इनकी रचनाओं में शांति की पक्षधरता तथा फासीवाद एवं युद्ध विरोधी स्वर मुखर रूप में दिखाई देता है।) अंधायुग (बर्त्तोल ब्रेख्त)… Continue reading अंधायुग (बर्त्तोल ब्रेख्त)

पाब्लो नेरूदा की कविता

मृत्यु (पाब्लो नेरूदा) (अनुवादः राजेश कुमार झा) सूने कब्रिस्तान निस्पंद, अस्थिपूरित कब्रें, मन की अंधेरी गहराइयां, अंधकार, अंधकार, अंधकार, गहन झंझावात में डूबती नैया- मृत्यु घेरती है अंतस्तल को, जैसे घुट रहा है गला दिल ही दिल में, जैसे अपनी ही त्वचा से पलायन करता प्राण, हौले हौले। बिछे हैं शव, चिपचिपे मृत्युप्रस्तर की कंपकंपाहट, अस्थियों… Continue reading पाब्लो नेरूदा की कविता

औरत/ नदी (उज्वला सामर्थ)

औरत/ नदी (उज्वला सामर्थ) (अनुवाद: राजेश कुमार झा) औरत हूँ मैं और इसीलिए नदी भी। बहती आई हूँ सदियों से, ढोती पीढ़ियों की गाद। झेली है मैंने टूटी उम्मीदों की बेशर्म चुभन, अचानक बेघर होने का दर्द, थकेमांदे लोगों का बुझा बुझा आक्रोश। लोरियां गाकर सुलाया है मैंने अपराधी अस्थि-पंजरों को, मगर साथ ही जानती… Continue reading औरत/ नदी (उज्वला सामर्थ)